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这个杀手不太冷

ट्रंप हमें पसंद नहीं... अमेरिका छोड़ दुबई, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, पुर्तगाल का रूख कर रहे अरबपति_我的网站

笑傲江湖

A |     नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रंप के 50 फीसदी टैरिफ के बीच RPG ग्रुप के चेयरमैन हर्ष गोयनका बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि कुछ अरबपति इसलिए अमेरिका छोड़ रहे हैं क्योंकि उन्हें डोनाल्ड ट्रंप पसंद नहीं हैं। उन्होंने भारत के अरबपतियों के माइग्रेशन पैटर्न पर एक गंभीर सवाल उठाया। उन्होंने इसे चिंताजनक कहा और प्रकाश डालते हुए कहां कि जहाँ भारत के कई अति-धनवान लोग लंदन और अमेरिका जैसे देशों को छोड़ रहे हैं, वहीं कोई भी भारत लौटने के लिए इच्छुक नहीं दिख रहा है।,सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (जिसे पहले ट्विटर कहा जाता था) पर गोयनका ने लिखा, "ज्यादातर अमीर भारतीय अरबपति टैक्स और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के चलते लंदन छोड़ रहे हैं और कुछ तो अमेरिका इसलिए छोड़ रहे हैं क्योंकि उन्हें ट्रंप पसंद नहीं हैं। उनकी नजर दुबई, सिंगापुर, पुर्तगाल, स्विट्ज़रलैंड पर है... लेकिन मेरे जानने वाले एक भी व्यक्ति भारत को विकल्प के तौर पर नहीं देख रहा है। आखिर ऐसा क्यों? यही वो सवाल है जिसका जवाब हमें अपने दिल में तलाशना होगा।",अभिनेता रणवीर शौरी ने इस पोस्ट पर मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "क्योंकि यहाँ बहुत भीड़ है! ज़्यादा लोगों को अरबपति बनकर यहाँ से निकल जाना चाहिए!" कोटक प्राइवेट द्वारा कंसल्टेंसी फर्म EY के सहयोग से हाल ही में किए गए एक सर्वे से पता चला है कि भारत के अति-धनवानों का एक बड़ा हिस्सा माइग्रेशन के बारे में सोच रहा है। सर्वे के अनुसार, 22% अति-धनवान भारतीयों ने खराब जीवन स्थितियों, जरूरी बुनियादी ढाँचे की कमी और विदेशों में उच्च जीवन स्तर का हवाला देते हुए, देश छोड़ने की योजना बनाई है। यह अध्ययन 150 हाई नेटवर्थ वाले व्यक्तियों (UHNI) के उत्तरों पर आधारित था।,इसके अलावा, हेनले प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट 2025 ने भारत के भविष्य पर एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। भारत उन टॉप पाँच देशों में से एक है जो सालाना सबसे ज्यादा करोड़पति खो रहे हैं। हालाँकि भारत छोड़ने वाले करोड़पतियों की संख्या में कमी आई है।,यह भी पढ़ें: एक चिढ़ा हुआ शासनाध्यक्ष, भारत आर्थिक रूप से सक्षम होकर ही ट्रंप की चुनौतियों का सामना कर सकता है。    परिमल सिंह, भागलपुर। Trump tariff updates भागलपुर का रेशमी कारोबार एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय संकट की चपेट में आ गया है। अमेरिका सरकार द्वारा कपड़ों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद यहां के निर्यातक (व्यवसायी) मुश्किल में है। स्थिति यह है कि करोड़ों रुपये का तैयार माल गोदामों में डंप है। बड़े निर्यातकों ने भी दिए गए आर्डर उठाने से हाथ खींच लिया है।,बिहार बुनकर कल्याण समिति के पूर्व सदस्य अलीम अंसारी बताते हैं कि भागलपुर से तसर कटिया, कटिया-कटिया, मटका, घिचा, झूड़ी सिल्क आदि कपड़े अमेरिका भेजे जाते थे। वहां इन कपड़ों का इस्तेमाल रेडीमेड गारमेंट्स और फर्निशिंग आइटम्स में होता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में टैरिफ लगने से वहां का बाजार महंगा हो गया है। इसीलिए डिमांड कम हो गयी है। पुराने आर्डर रोक दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि जिले में 75 करोड़ रुपये का तैयार माल डंप पड़ा हुआ है।,पुरैनी बुनकर समिति के अध्यक्ष अफजल आलम का कहना है कि भागलपुर से मटका सिल्क के बने फर्निशिंग आइटम अमेरिका में काफी पसंद किए जाते थे। लेकिन पिछले एक महीने से कोई शिपमेंट नहीं गया है। अफजल ने बताया कि अमेरिका से डिमांड बंद होने के कारण बुनकरों के अलावा रंगाई, प्रिंटिंग और पैकिंग से जुड़े कारीगर भी बेरोजगारी की कगार पर पहुंच गए हैं। वहीं नया बाजार स्थित सिल्क कारोबारी सुकेश अग्रवाल ने बताया कि अचानक से धागे की बिक्री घट गई है। कारोबार मंदा हो चुका है।,चंपानगर तांती बाजार के बुनकर हेमंत कुमार ने बताया कि हाल के कुछ महीने बुनकरों के लिए बहुत कठिन रहे हैं। यहां के बुनकर पीढ़ियों से इस धंधे से जुड़े हुए हैं, लेकिन मौजूदा हालात ने उनके भविष्य को संकट में डाल दिया है। बंग्लादेश की सीमा सील होने के कारण साड़ी, लूंगी, धोती आदि पहले ही डंप हो चुके थे। अब अमेरिका के टैरिफ ने सिल्क उद्योग को संकट में डाल दिया है।,उन्होंने कहा कि भागलपुर के बड़े निर्यातक भी इस संकट से जूझ रहे हैं। उनके अनुसार, आर्डर कैंसिल होने से लाखों रुपये का निवेश फंस गया है। कई निर्यातक अब मजदूरों की संख्या कम करने पर विचार कर रहे हैं। हेमंत ने कहा कि एक ओर धागे की कीमत बढ़ रही है, वहीं यहां के कपड़े की कीमत घटने लगी है।,ऐसी स्थिति में बुनकर अब यह सोचने को मजबूर हो गए हैं कि वे इस पेशे को छोड़कर कोई दूसरा रोजगार तलाशें। अलीम अंसारी ने कहा, भागलपुर की पहचान ही सिल्क है। अगर यही धंधा चौपट हो गया, तो भागलपुर की शान खतरे में पड़ जाएगी। टैरिफ के कारण कई बुनकर परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।,आर्थिक मामलों के जानकार सीए प्रदीप कुमार झुनझुनवाला का कहना है कि अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाने से दवा, हीरा और हस्तशिल्प उद्योग भी प्रभावित होने की संभावना है। देश में जो दवा का उत्पादन होता है, उसका 50 प्रतिशत अमेरिका को जाता है। यहां का हीरा 75 प्रतिशत और हस्तशिल्प 64 प्रतिशत का निर्यात अमेरिका को किया जाता है।。

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Published on:16:27:21


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